Russian President Vladimir Putin speaks during an interview with journalists and executives of Aaj Tak and India Today TV channels at the Kremlin in Moscow, Russia December 3, 2025. Sputnik/Vyacheslav Prokofyev/Pool via REUTERS ATTENTION EDITORS - THIS IMAGE WAS PROVIDED BY A THIRD PARTY.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की सफल यात्रा के बाद वापस मास्को लौट गए हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की इस पहली भारत यात्रा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही देश में निशाने पर हैं। पेंटागन के एक पूर्व अधिकारी ने कहा है कि भारत रूस से पहले दूरी बनाने में लगा हुआ था लेकिन ट्रंप की वजह से नई दिल्ली और मास्को में दोस्ती एक बार फिर से मजबूत हो गई है। अमेरिकी विश्लेषक माइकल कुगलमैन का मानना है कि पुतिन की यह यात्रा भारत और रूस के बीच भागीदारी में मजबूती की फिर से शुरुआत है। पिछले 4 साल में पहली बार हो रहा है जब पुतिन भारत आए हैं।
भारत ने यूक्रेन युद्ध को बंद किए जाने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध की वजह से रूस चीन के काफी करीब हो गया है। कुगलमैन ने कहा कि इस यात्रा से साबित हो गया है कि भारत रूस को लेकर अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकने जा रहा है।
कुगलमैन ने एनडीटीवी के साथ बातचीत में कहा कि भारत ने अमेरिकी टैरिफ के दबाव में रूस से तेल का आयात कम कर दिया है। इसके बाद भी इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के नेता रक्षा और व्यापार को लेकर एक नया रास्ता तलाश करेंगे। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के जरिए पुतिन और मोदी दोनों ने पश्चिमी देशों को यह संदेश दिया कि उनका दबाव दोनों को अलग नहीं करने जा रहा है। यह ठीक उसी तरह से है जैसे पीएम मोदी ने चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पुतिन से मुलाकात की थी। तीनों ने एक साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा संदेश दिया था।
भारत रूस से कम करेगा व्यापार घाटा
माइकल कुगलमैन ने कहा कि पुतिन की इस यात्रा के बाद अब हमें यह दिखाई देगा कि भारत के रूस के साथ व्यापार घाटे को कम करने के प्रयास तेज होंगे। इसके लिए भारत से रूस को निर्यात बढ़ने जा रहा है। इसके अलावा भारत और रूस के बीच हथियारों को लेकर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से अब पश्मिची देशों को अहसास हो जाएगा कि रूस अलग थलग नहीं है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर देश बना रहेगा। हालांकि भारत अपनी रूस से निर्भरता को कम करेगा जैसा कि वह पिछले कुछ साल से कर रहा है। अमेरिका, इजरायल और फ्रांस जैसे देश अब बड़े हथियार सप्लायर बन गए हैं।
वहीं भारतीय विश्लेषक तन्वी मदान का कहना है कि पुतिन की इस यात्रा के जरिए भारत ने अपनी रणनीति स्वायत्त का प्रदर्शन किया है। भारत ने यह दिखाया है कि वह रूस के साथ रिश्तों को लेकर किसी और देश को वीटो नहीं करने देगा। भारत ने अपनी विदेश नीति में विविधता लाने के लिए इसके जरिए प्रयास किया है। मदान ने कहा कि इसके बाद भी भारत ने अपने अन्य महत्वूपर्ण पार्टनर देशों के साथ रिश्तों की संवेदनशीलता का ध्यान रखा है। इसी के तहत किसी बड़े हथियार डील का ऐलान नहीं किया गया। माना जा रहा है कि इसका ऐलान बाद में होगा। उन्होंने भारत सरकार को इस वास्तविकता का सामना करना होगा कि अमेरिका, यूरोप और जापान भारत के बेहद अहम पार्टनर देश हैं। भारत के कुल निर्यात का 40 फीसदी हिस्सा यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका को जाता है। वहीं रूस को निर्यात केवल 1 प्रतिशत ही होता है। भारतीय प्रधानमंत्री ने पुतिन के सामने ही कह दिया कि वह यूक्रेन में शांति के समर्थक हैं।