दुनिया जिस तेजी से स्टील्थ लड़ाकू विमानों की तरफ जा रही है, AI-इंटीग्रेटेड और सेंसर-फ्यूज़्ड एयर वारफेयर की ओर बढ़ रही है, वहां राफेल F5 की सबसे बड़ी चुनौती उसका पुराना एयरफ्रेम है। ये एक ऐसा डिजाइन है, जो कभी स्टील्थ-युग के लिए बना ही नहीं था।
भारत जिन राफेल लड़ाकू विमानों को ऑपरेट करता है वो F3-R वैरिएंट है और फ्रांस F-4 वैरिएंट बना चुका है, जो फिलहाल प्रोडक्शन में है। कुछ सालों में एफ-4 वैरिएंट कुछ चुनिंदा देशों के पास आ जाएंगे। लेकिन इन सबके आगे F-5 वैरिएंट भी बनने के काफी करीब पहुंच चुका है, जो अपने हर टेस्ट में कामयाबी हासिल कर रहा है। राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट, राफेल F5 को “सुपर राफेल” बताकर बाजार को रिझाने की कोशिश कर रही है, जिसमें एडवांस सेंसर, नेटवर्किंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर है।
लेकिन जैसे-जैसे हवाई लड़ाई विमानों की स्टेल्थ क्षमता, AI आधारित हो रही है और जब अमेरिका F-47 NGAD और चीन के J-36/J-50 जैसे छठी पीढ़ी के विमान बना रहे हैं, तो F-5 के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, राफेल F5 विमान की हर क्षमता के बावजूद एक हकीकत ये है कि ये दुश्मन के सेंसर से सच में गायब नहीं हो सकता।
Rafale F5 की सबसे बड़ी दिक्कत क्या है?
दरअसल, दुनिया जिस तेजी से स्टील्थ लड़ाकू विमानों की तरफ जा रही है, AI-इंटीग्रेटेड और सेंसर-फ्यूज़्ड एयर वारफेयर की ओर बढ़ रही है, वहां राफेल F5 की सबसे बड़ी चुनौती उसका पुराना एयरफ्रेम है। ये एक ऐसा डिजाइन है, जो कभी स्टील्थ-युग के लिए बना ही नहीं था। यह जेट दुश्मन को धोखा दे सकता है, जाम कर सकता है, बच सकता है, लेकिन अदृश्य नहीं हो सकता। आने वाले दशक में जब लड़ाई Rafale F5 की दृश्यता उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। लेकिन राफेल के मुकाबले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और भी ज्यादा एडवांस बन रहे हैं।
अमेरिकी F-35 अब सिर्फ स्टील्थ स्ट्राइक फाइटर नहीं, बल्कि एक ‘एरियल सेंसर-हब’ बन चुका है। F-22 आज भी हवाई क्षमता के मामले में बाकी विमानों से कहीं आगे है। एफ-35 और एफ-22 गजब का किल चेन नेटवर्क बनाते हैं। ये लड़ाकू विमान सिर्फ मिसाइल नहीं दागते, बल्कि ये पूरे लड़ाई क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित कर लेते हैं। ये जमीन, हवा, समुद्र और स्पेस के सेंसरों को एक ही लड़ाकू नेटवर्क में जोड़ते हैं। इसके मुकाबले, राफेल F5 पीछे छूट जाता है। जबकि राफेल की कीमत एफ-35 जैसे लड़ाकू विमान के बराबर या ज्यादा ही हैं। इसीलिए ऐसी बात भी नहीं है कि गरीब देश इसे ऑपरेट कर पाएं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया में, जो एयर फोर्स पुराने डिजाइन पर दांव लगा रही हैं, वे बचने की क्षमता के बजाय पुरानी यादों को चुन रही हैं और ऐसे जोखिम उठा रही हैं जो शायद उनके दुश्मन नहीं उठाएंगे।
एडवांस होकर भी पीछे छूट रहा राफेल F-5
F5-क्लास राफेल, टेक्निकल शब्दों में कहें तो, अब तक का सबसे बेहतरीन राफेल है। एडवांस्ड सेंसर का नया सेट, बेहतर नेटवर्किंग, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ज्यादा शार्प वेपन लोडआउट.. यानि एक शानदार फाइटर जेट। अपने किसी भी पिछले वेरिएंट की तुलना में ज्यादा स्लीक, ज्यादा खतरनाक और ज्यादा डिजिटली इंटीग्रेटेड। फिर भी एयरोडायनामिक और विजिबिलिटी, सिग्नेचर कॉम्प्रोमाइज की वजह से ये चकमा खा सकता है, इसे धोखा दिया जा सकता है, ये गायब नहीं हो सकता। स्टील्थ फाइटर्स और छठी पीढ़ी के बनाए जा रहे विमान राफेल F-5 को अपने किल चेन में फंसा सकते हैं, इसीलिए एक्सपर्ट्स ऐसे देशों को, जिनके दुश्मन काफी ताकतवर हैं, उन्हें राफेल एफ-5 में दिलचस्पी दिखाने से पहले सौ बार और विचार करने की सलाह दे रहे हैं।