भारत में 210 मिलियन क्रिप्टो यूजर्स के साथ डिजिटल एसेट मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदार इनोवेशन के जरिए प्लेटफॉर्म यूजर्स का भरोसा जीत रहे हैं। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, सख्त वेरिफिकेशन और शिक्षा से सुरक्षित क्रिप्टो इकोसिस्टम बन रहा है।
भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल एसेट मार्केट्स में शामिल है। यहां करीब 210 मिलियन क्रिप्टो यूजर्स हैं, जो अमेरिका के 180 मिलियन यूजर्स से ज्यादा हैं। इस बढ़त को हल्के में नहीं लिया जा सकता। भारतीय, टेक्नोलॉजी को लेकर ज्यादा जागरूक हैं और निवेश के नए ऑप्शन आजमाने को तैयार रहते हैं। इसके अलावा, लोग अब प्लेटफॉर्म पर भरोसा करने को लेकर पहले से ज्यादा चौकन्ने भी रहने लगे हैं। ऐसे में प्लेटफॉर्म की सुरक्षा सबसे बड़ा और जरूरी मुद्दा बन जाता है।
इसी से तय होता है कि यूजर किसी प्लेटफॉर्म पर भरोसा करेगा या नहीं।
क्यों किसी प्लेटफॉर्म की सुरक्षा उसकी विश्वसनीयता को तय करती है
इनवेस्टर्स के शुरुआती एक्सपीरियंस बताते हैं कि प्लेटफॉर्म की सुरक्षा पर जोर देना क्यों सही है? बिना वेरिफिकेशन, कमजोर लॉग-इन सिस्टम या ठीक तरह के निगरानी सिस्टम के बिना काम करने वाले प्लेटफॉर्म शुरू-शुरू में काफी बेहतरीन और तेज लग सकते हैं। हालांकि बाद में यही कमियां बड़ी समस्या बन जाती हैं। दरअसल, बाद में जब संदिग्ध गतिविधियां पकड़ में आती हैं और वेरिफिकेशन स्टेप्स सही से काम नहीं करते या कोई सुरक्षा से जुड़ा उल्लंघन होता है, तो यूजर का भरोसा टूट जाता है और प्लेटफॉर्म की छवि मिट्टी में मिल जाती है।Binance जैसे ग्लोबल लीडर्स ने अपने प्लेटफॉर्म के हर हिस्से में मजबूत सुरक्षा और भरोसेमंद सिस्टम को शामिल करके सुरक्षा का एक गोल्ड स्टैंडर्ड सेट किया है।
इस बारे में Binance के APAC हेड एसबी सेकर बताते हैं, “FIU-IND में हमारा रजिस्ट्रेशन दिखाता है कि हम सख्त यूजर वेरिफिकेशन और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं। इसके अलावा, हम सिर्फ नियम मानने तक सीमित नहीं हैं। हम अपने यूजर्स की सुरक्षा के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे- बायोमेट्रिक फेशियल रिकॉग्निशन, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग का इस्तेमाल करते हैं। इससे हर ट्रांजेक्शन और अकाउंट एक्टिविटी सुरक्षित रहने के साथ प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता भी बनी रहती है।”
यूजर का भरोसा जीतने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए, Binance ने कुछ नए और बेहद जरूरी कदम उठाए हैं। इनका मकसद यह दिखाना है कि प्लेटफॉर्म में रखा हर एसेट पूरी तरह से सुरक्षित है और प्लेटफॉर्म पूरी तरह से भरोसेमंद है:
1:1 प्रूफ ऑफ रिजर्व्स: यह एक क्रिप्टोग्राफिक टेक्नोलॉजी है, जिसके जरिए कोई भी यह चेक कर सकता है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद सभी यूजर एसेट्स 100% सुरक्षित हैं। इसमें आपकी प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं होता। इस स्तर की पारदर्शिता से इंडस्ट्री में नया स्टैंडर्ड तय हो गया है। अब सेंटरलाइज्ड एक्सचेंज के लिए यह साबित करना जरूरी है कि उनके पास उतने फंड मौजूद हैं, जितने वे यूजर्स के एसेट्स के रूप में संभाल रहे हैं। यानी प्लेटफॉर्म आर्थिक रूप से मजबूत है और किसी भी समय यूजर्स के पैसे लौटाने की क्षमता रखता है।
SAFU (सिक्योर एसेट फंड फॉर यूजर्स) : 2018 में शुरू किया गया यह फंड Binance का इमरजेंसी रिजर्व फंड है, जिसकी वैल्यू 1 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा है। यह फंड ब्लॉकचेन पर उपलब्ध है, जिससे यूजर्स को भरोसा रहता है कि किसी भी आपात स्थिति में उनके नुकसान की भरपाई करने के लिए प्लेटफॉर्म के पास पर्याप्त फंड उपलब्ध है। यह यूजर्स के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
किस तरह पूरी इंडस्ट्री को ज्यादा बेहतर बना रहा Binance
Binance डिजिटल एसेट्स की सुरक्षा बढ़ाने में कई तरह से योगदान दे रहा है। इसकी पहल सिर्फ अपने प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्रिप्टो सेक्टर को सुरक्षित बनाने का काम कर रहा है।
स्पेशलाइज्ड वर्कफोर्स: Binance के पास दुनिया भर में 1,280 से ज्यादा एक्सपर्ट हैं जो सिर्फ कॉम्प्लायंस, जांच और रिस्क मैनेजमेंट का काम करते हैं। यह Binance की पूरी टीम का 22% हिस्सा है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग: Binance ने अब तक दुनिया भर की जांच एजेंसियों से आए 2,40,000 से ज्यादा रिक्वेस्ट प्रोसेस की हैं और 400 से ज्यादा ट्रेनिंग सेशन भी कराए हैं।
भारत में, Binance स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है। यह उन्हें ब्लॉकचेन एनालिसिस और फॉरेन्सिक सपोर्ट भी उपलब्ध कराता है, जिससे बड़े घोटालों का पता लगाने और यूजर्स को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।इंडस्ट्री पार्टनरशिप: Binance, Beacon Network और T3+ प्रोग्राम जैसी खास तरह की पहल का हिस्सा भी है। ये पहल Tether, TRON और TRM Labs जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर चलाई गई हैं।
इनकी मदद से अवैध फंड को रियल-टाइम में ट्रैक और फ्रीज किया जा सकता है। इससे गलत लेन-देन को रोकने और पूरे क्रिप्टो सेक्टर को सुरक्षित बनाने में काफी मदद मिलती है।
Binance को दुनिया भर में 22 रेगुलेटरी अप्रूवल मिले हैं और इसके पास SOC 2 Type II, ISO 27001, ISO 27701 और PCI-DSS जैसे जरूरी सुरक्षा सर्टिफिकेशन भी हैं। इसका मतलब है कि Binance अब “कुछ होने पर कार्रवाई” वाली सोच से आगे बढ़कर डेटा और एनालिटिक्स पर आधारित आधुनिक सुरक्षा मॉडल अपना चुका है।