K-4 Missile: पाकिस्तान के रणनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये पनडुब्बियां भारत को ऐसी सुरक्षित दूरी से सेकंड स्ट्राइक काबिलियत (second strike) देती हैं, जिसके बाद नई दिल्ली पारंपरिक स्तर पर ज्यादा आक्रामक कदम उठाने से नहीं हिचकेगी।
चीनी जासूसी जहाजों के हिंद महासागर में पहुंचने के बावजूद भारत ने पनडुब्बी से दागी जाने वाली परमाणु मिसाइल लॉन्च कर पूरी दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करवाया है। बहुत आसान भाषा में जानिए तो अगले 10-15 सालों तक दुनिया के पास कोई ऐसा एयर डिफेंस सिस्टम नहीं होगा, जो भारत की K-4 मिसाइल को इंटरसेप्ट कर सके। यानि, भगवान ना करे ऐसी नौबत आए, लेकिन अगर कभी इस मिसाइल को युद्ध में चलाने की नौबत आई, तो समझ लीजिए उस दिन दुश्मन का समूल विनाश होगा। पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी के रणनीतिक प्लान्स डिवीजन में आर्म्स कंट्रोल एडवाइजर हैं और पूर्व ब्रिगेडियर डॉ. जाहिर काजमी ने भारत की इस मिसाइल टेस्ट को पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा खतरा और चिंता की बात बताया है।
डॉ. जाहिर काजमी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत की इस मिसाइल लॉन्च को लेकर कई पोस्ट लिखे हैं। जिसमें उन्होंने कहा है कि “भारत की तरफ से हाल ही में आईएनएस अरिघात से K-4 पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का सफल परीक्षण सिर्फ भारत की समुद्री परमाणु क्षमता का विस्तार नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पाकिस्तान की सामरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के K-4 मिसाइल टेस्ट से डरा पाकिस्तान
डॉ. जाहिर काजमी ने पाकिस्तान की चिंता का इजहार करते हुए लिखा है कि “करीब 3,500 किलोमीटर रेंज वाली यह मिसाइल भारत को समुद्र के भीतर से परमाणु हमला करने की क्षमता देती है, जिससे उसकी न्यूक्लियर ट्रायड और ज्यादा मजबूत हो गई है। पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में चिंता इस बात की है कि यह क्षमता, अब भारत को लगातार समुद्र में मौजूद परमाणु प्रतिरोध (quasi-continuous at-sea deterrence) की तरफ ले जा रही है।” उन्होंने लिखा है कि “इस क्षमता के हासिल होने के बाद अब भारत को किसी भी संकट की स्थिति में पहले से कहीं ज्यादा जोखिम लेने का आत्मविश्वास मिल सकता है।”
इसके अलावा डॉ. जाहिर काजमी ने अक्टूबर महीने में स्ट्रैटजिक फॉरकास्ट में एक लेख लिखा था, जिसमें भी उन्होंने K-4 मिसाइल को लेकर पाकिस्तान की चिंताओं का इजहार किया था। उन्होंने लिखा था कि “पाकिस्तान का डर सिर्फ के-4 मिसाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत जिस तरह से समुद्र में अपनी शक्ति का विस्तार कर रहा है, समुद्री परमाणु शक्ति का विस्तार कर रहा है, वो पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा खतरा है।” उन्होंने लिखा था कि “भारत 2030 के दशक तक 6 परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBNs) और 6 परमाणु हमलावर पनडुब्बी (SSNs) तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है। 7,000 टन वजनी S4-क्लास पनडुब्बियां, जिनमें INS अरिधमान शामिल है, वो जल्द ही ऑपरेशनल होने की कगार पर हैं।
पाकिस्तान पर सुरक्षित दूरी से हमला कर सकता है भारत’
पाकिस्तान के रणनीतिक एक्सपर्ट डॉ. जाहिर काजमी का मानना है कि ये पनडुब्बियां भारत को ऐसी सुरक्षित दूरी से सेकंड स्ट्राइक काबिलियत (second strike) देती हैं, जिसके बाद नई दिल्ली पारंपरिक स्तर पर ज्यादा आक्रामक कदम उठाने से नहीं हिचकेगी। यानि, पाकिस्तान को डर इस बात को लेकर है कि भारत अब ज्यादा आक्रामक अंदाज में उससे पारंपरिक लड़ाई कर सकता है। उन्होंने लिखा है कि भारत अब अपनी परमाणु छतरी के नीचे से पारंपरिक लड़ाई में पाकिस्तान पर और ज्यादा दबाव बनाने की नीति पर काम करेगा। उन्होंने लिखा है कि पिछले कुछ सालों में भारत की सैन्य रणनीति पूरी तरह से बदल गई है। जैसे 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 में बालाकोट स्ट्राइक और मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर। मई 2025 के संघर्ष में भारतीय नौसेना ने समुद्री दबाव बनाने का काम किया है।
पाकिस्तान को अब भारत से क्या डर है?
डॉ. जाहिर काजमी के मुताबिक अब पाकिस्तान को आशंका है कि भारत की बढ़ती समुद्री परमाणु ताकत, पूरे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) को अस्थिर कर सकती है। के-4 मिसाइल की रेंज न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि चीन के भी ज्यादातर हिस्सों को अपनी जद में रखती है। जिससे क्षेत्रीय शक्तियों को अपनी पनडुब्बी गतिविधियां और बढ़ानी पड़ेंगी। इसके साथ ही भारत की अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और क्वाड जैसे मंचों के साथ बढ़ती समुद्री सहयोग भी इस्लामाबाद के लिए चिंता का विषय है।