राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 28 दिसंबर को कारवार में नौसेना की कलवरी क्लास पनडुब्बी में सी-सॉर्टी करेंगी। यह पनडुब्बी दुश्मन के रडार को चकमा देने और जासूसी में माहिर है, जिसमें एडवांस्ड एकॉस्टिक साइलेंसिंग तकनीक लगी है। यह 50 दिनों तक पानी के अंदर रह सकती है और खतरनाक हमले करने में सक्षम है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 28 दिसंबर को इंडियन नेवी के सबमरीन (पनडुब्बी) मे सवारी करेंगी। वे सबमरीन में सी-सॉर्टी करेगी। इसके लिए राष्ट्रपति कारवार जाएंगी। वहां नेवी के कलवरी क्लास सबमरीन में राष्ट्रपति जाएंगी। राष्ट्रपति पिछले साल नेवी के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर में भी गई थी। इसी साल अक्टूबर मे राष्ट्रपति ने एयरफोर्स के फाइटर जेट रफाल मे भी उड़ान भरी थी। तो चलिए जानते हैं नेवी के कलवरी क्लास पनडुब्बी की खासियत…
कलवरी क्लास पनडुब्बी की खासियत
- बता दें कि कलवरी क्लास की पनडुब्बी एक ऐसी खास पनडुब्बी है जो दुश्मन के रडार को चकमा दे सकती है। यह इलाके की निगरानी करने और जासूसी करने में माहिर है। इसमें खास ‘एडवांस्ड एकॉस्टिक साइलेंसिंग तकनीक’ लगी है, जिसकी वजह से पानी में चलते समय यह बिल्कुल आवाज नहीं करती। अगर दुश्मन ने कोई चालाकी दिखाई, तो यह पनडुब्बी खतरनाक तरीके से हमला भी कर सकती है।
- इस पनडुब्बी के अंदर एंटी-टॉरपीडो काउंटरमेजर सिस्टम, 533 मिमी के छह टॉरपीडो ट्यूब, 18 एसयूटी टॉरपीडो या एसएम.39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता और 30 समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता शामिल है।
- यह पनडुब्बी 50 दिनों तक पानी के अंदर रह सकती है और 350 फीट की गहराई तक जा सकती है। इसमें 8 सैन्य अधिकारी और 35 नाविकों को तैनात किया जा सकता है। INS कलवारी, खंडेरी, करंज, वेला, वागीर भी कलवरी क्लास सबमरीन हैं।
- यह खास पनडुब्बी पानी की सतह पर 20 किमी/घंटा और पानी के अंदर 37 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती है। अगर यह 15 किमी/घंटा की रफ्तार से सतह पर चलती है, तो यह 12 हजार किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है।
- इसमें एक अटैक-एंड-सर्च पेरिस्कोप है जो इन्फ्रारेड, लो लाइट लेवल कैमरों और लेजर रेंज फाइंडर से लैस है जो समुद्र की सतह पर लक्ष्यों को खोजने में मदद करता है।
बता दें कि INS कलवरी स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी है। इसका निर्माण महाराष्ट्र के मुंबई स्थित मझगांव डॉक्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। इसमें DCNS (नौसेना रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त फ्रांसीसी औद्योगिक समूह) से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सहायता प्राप्त हुई है। मझगांव डॉक्स लिमिटेड रक्षा मंत्रालय के स्वामित्व वाला एक शिपयार्ड है। कलवरी का डिजाइन DCNS ने मझगांव डॉक्स लिमिटेड के सहयोग से तैयार किया था।