State Power Distribution Companies: भारत सरकार घाटे में चल रहीं राज्य की बिजली वितरण कंपनियों को प्राइवेट हाथों में सौंप सकती है। इसके लिए सरकार ने एक प्लान बनाया है।
भारत सरकार अपने राज्य के बिजली वितरण कंपनियों को बचाने के लिए एक बड़ी योजना पर विचार कर रही है। यह योजना करीब 1 लाख करोड़ रुपये यानी 12 अरब डॉलर की हो सकती है। ये कंपनियां भारी कर्ज में डूबी हुई हैं और इन्हें पैसों की सख्त जरूरत है। माना जा रहा है कि इससे ambani जैसे उद्योगपतियों को फायदा हो सकता है।
इस मदद को पाने के लिए राज्यों को कुछ शर्तें माननी होंगी। रॉयटर्स के मुताबिक तीन सरकारी अधिकारियों और बिजली मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए एक डॉक्यूमेंट के अनुसार राज्यों को या तो अपनी बिजली वितरण कंपनियों को निजी हाथों में सौंपना होगा या फिर उनका प्रबंधन निजी कंपनियों को देना होगा। एक और विकल्प यह है कि वे अपनी कंपनियों पर नियंत्रण तो रखें, लेकिन उन्हें share market में लिस्ट कराएं।
बजट में हो सकती है घोषणा
यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक बड़ा सुधार कदम है। अभी तक राज्य की बिजली वितरण कंपनियां बहुत अक्षम मानी जाती हैं और वे भारत की ऊर्जा व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी हैं। दो सरकारी सूत्रों ने बताया कि बिजली मंत्रालय और वित्त मंत्रालय इस योजना के अंतिम विवरण पर चर्चा कर रहे हैं। उम्मीद है कि इसकी घोषणा फरवरी में आने वाले बजट में की जाएगी।
क्या है सरकार का प्रस्ताव?
प्रस्ताव के अनुसार, राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी कुल बिजली खपत का कम से कम 20% हिस्सा निजी कंपनियों द्वारा पूरा किया जाए। साथ ही, राज्यों को इन वितरण कंपनियों के कुछ कर्ज का बोझ भी उठाना होगा। इसके लिए राज्यों के पास अपने वितरण कार्यों को निजी बनाने के दो विकल्प हैं, ताकि वे मौजूदा कर्ज चुकाने के लिए लोन ले सकें।
पहला विकल्प
राज्य एक नई वितरण कंपनी बनाएं और उसमें 51% हिस्सेदारी बेच दें। ऐसा करने पर, नई बनी निजी कंपनी को 50 साल के लिए बिना ब्याज वाला लोन मिल सकता है, जो उसके कर्ज को चुकाने के काम आएगा। इसके अलावा अगले पांच साल तक उन्हें केंद्र सरकार से कम ब्याज वाले लोन भी मिलेंगे।
दूसरा विकल्प
राज्य अपनी मौजूदा सरकारी बिजली वितरण कंपनी की 26% तक हिस्सेदारी निजी हाथों में बेच सकते हैं। इसके बदले में उन्हें अगले पांच साल तक केंद्र सरकार से कम ब्याज वाले लोन मिलेंगे।