पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि का रोना रोया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सिंधु जल संधि को भारत रोक नहीं सकता है और इसके खिलाफ होने वाली किसी भी गतिविधि को वह नई दिल्ली के साथ उठाएगा।
सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के भारत के फैसले से पाकिस्तान अब तक नहीं उबर पा रहा है। संधि पर रोक से पाकिस्तान पर कितनी तगड़ी मार पड़ी है, यह इस बात से पता चलता है कि आठ महीने बीत जाने के बाद भी उसकी तिलमिलाहट कम नहीं हो रही है। अब एक बार पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर बयान दिया है। पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा कि वह सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का कथित उल्लंघन करके पश्चिमी नदियों पर संचालित भारत की किसी भी विकास गतिविधि को उसके साथ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर उठाएगा।
पाकिस्तान ने बताया बाध्यकारी समझौता
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने यहां साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में यह भी कहा कि आईडब्ल्यूटी एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है और संधि को रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाए थे, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि को रोकना भी शामिल था।
भारत में बांध से घबराया पाकिस्तान
अंद्राबी ने कहा कि चिनाब, झेलम और नीलम नदी पर बनी कोई भी परियोजना सिंधु जल संधि के तहत जांच के दायरे में आती है और “हमारे सिंधु जल आयुक्त ने चिनाब नदी पर कुछ परियोजनाओं को लेकर पत्र लिखा है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर झेलम और नीलम में कुछ विकास कार्य होते हैं, तो जाहिर है कि हम इसे भारत के साथ, सिंधु आयुक्त के स्तर पर उठाएंगे। हम इसे भारत के साथ राजनीतिक/राजनयिक स्तर पर और प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठा सकते हैं।’
अंद्राबी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की इस टिप्पणी को ‘गैर-ज़िम्मेदाराना और गुमराह करने वाला’ बताया कि पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद को समर्थन देने के लिए प्रशिक्षण शिविर चला रहा है।’ भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस संधि के साथ भारत से बहने वाली 3 नदियों का पानी पाकिस्तान को मिलता है। पाकिस्तान ने लगातार आरोप लगाया है कि भारत उसे मिलने वाले पानी को रोक रहा है।