पीएम मोदी 30 अगस्त को पूरे सात साल बाद चीन पहुंचे हैं। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की मीटिंग से पहले आज चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की।
जून 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद भारत-चीन के संबंध खराब हो गए थे। अब मोदी के इस दौरे से दोनों देशों के संबंध सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।
मोदी के चीन दौरे को दुनियाभर का मीडिया कवर कर रहा है। जानिए किसने क्या लिखा..
न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी, जिनपिंग और पुतिन की तस्वीर के साथ रिपोर्ट में लिखा है कि शी जिनपिंग के लिए इससे बेहतर मौका शायद ही कोई हो सकता था।
एक तरफ भारत के मोदी हैं, जिनके देश पर राष्ट्रपति ट्रम्प ने ऊंचे टैरिफ लगाए हैं। दूसरी तरफ रूस के पुतिन हैं, जिन पर ट्रम्प की वजह से ही पश्चिमी देशों के प्रतिबंध कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।
अखबार लिखता है कि इस पूरे आयोजन के केंद्र में जिनपिंग हैं। वे भारत और अमेरिका के बीच तनाव को अपने लिए अवसर बना रहे हैं और पुतिन के साथ अपने पुराने गठबंधन को और मजबूती दे रहे हैं।
यह सम्मेलन सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं है। इसमें मध्य एशिया के 20 से ज्यादा नेता शामिल हो रहे हैं। इसके बाद बीजिंग में चीन अपनी नई मिसाइलों और युद्धक विमानों की सैन्य परेड भी करेगा।
यह सब दर्शाता है कि शी इतिहास, कूटनीति और सेना की ताकत को मिलाकर दुनिया की उस व्यवस्था को बदलना चाहते हैं जिस पर अब तक अमेरिका का दबदबा रहा है।
मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका ने भारत और चीन दोनों पर ऊंचे टैरिफ लगाए हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये टैरिफ भारत के निर्यात क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दूसरी ओर, चीन भी अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ उसके लिए भी चुनौती बने हुए हैं।
बीजिंग की वुसावा एडवाइजरी की संस्थापक कियान लियू का कहना है, ‘दुनिया का ध्यान अब तक अमेरिका-चीन रिश्तों पर रहा, लेकिन अब भारत और चीन के बीच सहयोग पर ध्यान देना चाहिए।’
जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल कजान में हमारी बहुत उपयोगी चर्चा हुई थी, जिससे हमारे संबंध बेहतर हुए। मोदी ने कहा, ‘हम आपसी सम्मान, विश्वास और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
सीमा विवाद मोदी ने कहा कि अब यहां शांति का माहौल बना है। साथ ही दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें, जो 2020 से निलंबित थीं, फिर से शुरू की जा रही हैं, लेकिन कोई समय-सीमा नहीं बताई गई।
चीन का शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जनसंख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय समूह है। 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर SCO की स्थापना की थी।
पहले यह समूह मध्य एशियाई मुद्दों पर ध्यान देता था, लेकिन अब यह वैश्विक मामलों पर चर्चा का मंच बन चुका है। यह समिट नेताओं और अधिकारियों के लिए एक मंच है, जहां वे अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं।
इस बार समिट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यापार नीतियों का असर दिख सकता है, क्योंकि कई देशों के साथ उनके व्यापारिक तनाव हैं। समिट में पुतिन, बेलारूस के नेता अलेक्जेंडर लुकाशेंको, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस जैसे नेता शामिल होंगे।
भारत-पाकिस्तान, भारत-चीन, सऊदी अरब-ईरान जैसे देशों के बीच पुराने विवाद भी इस समिट में चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं।